शहीदों की याद दिलाता रहेगा बोरास का मकर संक्रांति का मेला

रायसेन /उदयपुरा @अखिलेश शर्मा की रिपोर्ट…

आज की युवा पीढ़ी हमारे देश का स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाती आ रही है। रायसेन जिले एवं सीहोर जिले की युवा पीढ़ी को यह बात बताना आवश्यक है कि भले ही भारत 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हो गया था, मगर मध्य प्रदेश के रायसेन और सीहोर दो ऐसे जिले थे जो भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान के गुलाम बने रहे। जब आजादी का जश्न सारे देश में मनाया जा रहा था तब भोपाल स्टेट के अंग्रेजपरस्त नवाब हमीदुल्लाखां ने मातम मनाया था। उन्होंने अपने छोटे से स्टेट को भारत संघ में विलय करने से मना कर दिया था। परिणाम स्वरूप दोनों जिलों में नवाब शाही के दंश को जनता ने 1 जून 1949 तक भोगा। जब तक की सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भोपाल नवाब को दिल्ली बुलाकर भोपाल रियासत के भारत संघ में विलय करने की स्वीकृति पत्र पर हस्ताक्षर नहीं करा लिए। इसका बड़ा कारण बना रायसेन जिले की तहसील उदयपुरा का गांव बोरास। जहां चार युवकों ने सीने पर गोलियां खाकर तिरंगे की शान को बरकरार रखा था।

क्या हुआ था उस दिन
पूरे भोपाल स्टेट में नवाब के खिलाफ बगावत का बिगुल बच चुका था। सैकड़ों लोगों को नबाब ने गिरफ्तार कराया। इनमें घनश्याम दास मालाणी, नित्यगोपाल शर्मा, धनराज रघुवंशी जैसे लोग शामिल थे। बाबजूद इसके नबाबी शासन के विरुद्ध आंदोलन जारी रहा। इसी कड़ी में बोरास तट पर लगने वाले मकर संक्रांति के मेला में सभा के साथ तिरंगा फहराने की तैयारी की गई। योजना के अनुसार ध्वज वंदन हुआ, राष्ट्रगान बैजनाथ बिजली बाबा ने गाया। तभी पहुंचे थानेदार तिरंगा झंडा उतारने की कोशिश की। जब उसका तीखा विरोध हुआ तो उसने गोली चलाने के आदेश दे दिए।

देखते ही देखते क्षेत्र के चार युवा शहीद हो गए, लेकिन उन्होंने तिरंगा झंडे को झुकने नहीं दिया। तिरंगा नौजवान छोटे सिंह राजपूत के हाथ में था, उसके सिर में गोली लगी तो धन सिंह ने लपककर तिरंगा थाम लिया। यह देख नबाब की पुलिस ने धनसिंह पर गोली दागी, उसे गोली लगते ही मंगल सिंह नामक युवक ने तिरंगा थाम लिया। लेकिन पुलिस की गोली उसके सीने पर भी जा लगी। तब युवा विश्राम सिंह ने तिरंगा थामा और आगे बढ़ा, अंतत: पुलिस की गोली ने उसे भी नर्मदा के आंचल में लिटा दिया। लेकिन मरते दम तक झंडे को झुकने नहीं दिया।

यह खबर सारे देश में जंगल की आग की तरह फैल गई और यही बोरास का गोलीकांड नबाबी शासन के अंत का कारण बना। नबाबी स्टेट की जनता ने एक जून 1949 को आजादी की खुली हवा में सांस ली।

आज अर्पित करेंगे श्रद्धांजलि…
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी जनपद पंचायत उदयपुरा, ग्राम पंचायत बोरास एवं प्रशासन द्वारा शहीद स्तंभ बोरास में प्रशासन की ओर से श्रद्धा सुमन अर्पित किए जाएंगे। मेले में शहीदों की याद में सभा होगी जिसमे अनेक जनप्रतिनिधि भाग लेंगे।