नासा के वैज्ञानिक ने कहा- हो सकता है एलियन धरती पर आए हों लेकिन हमें पता न चला हो

नई दिल्ली: एलियन को लेकर तरह-तरह की बातें होती रहती हैं. नासा के एक वैज्ञानिक ने अनुमान जताया है कि हो सकता है कि एलियन धरती पर आए हों और हमें पता न चला हो. एक रिसर्च पेपर में नासा के वैज्ञानिक प्रोफेसर सिल्वानों पी कोलंबो ने यह दावा किया है. उनका कहना है कि हो सकता है कि एलियंस की संरचना कार्बन संरचना पर आधारित न हो इसलिए हमें इसका पता नहीं चल पाया हो. उनका ये भी कहना है कि हो सकता है कि इंसानों की कल्पना से एलियन बिल्कुल अलग हों.

इंडिपेंडेंट की खबर के मुताबिक उन्होंने रिसर्च पेपर में लिखा है कि जरूरी नहीं कि दूसरी दुनिया के जीव जिन्हें हम ढूंढ रहे हैं या जो हमें ढूंढ रहे हैं (अगर वो पहले हमें न ढूंढ सकें हो तो) वे हमारी तरह कार्बन आधारित ही हों. प्रोफेसर सिल्वानों पी कोलंबो ने रिसर्च पेपर में लिखा है कि 10 हजार साल पहले हमारी सभ्यता शुरू हुई थी लेकिन पिछले 500 सालों में हमने वैज्ञानिक तौर पर उपलब्धियां देखी हैं. ऐसे में हो सकता है कि एलियन हमसे टेक्नोलॉजी में आगे हों.

एलियन को लेकर हमें अपनी धारणाओं पर फिर से काम करने की जरूरत है. प्रोफेसर सिल्वानों पी कोलंबो का कहना है कि हो सकता है कि एलियंस आकार में हमसे बहुत छोटे हों. हालांकि रिसर्च पेपर में उन्होंने लिखा है कि हो सकता है एलियंस ने उस तकनीक का भी पता लगा लिया हो जिसके बारे में हम सोच भी नहीं पाते हों.

हालांकि एक शोध में दावा किया गया था कि दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश कर रहे खगोलविदों के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहायक सिद्ध हो सकती है. ब्रिटेन की प्लाइमाउथ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कृत्रिम तंत्रिका नेटवर्क (एएनएन) का उपयोग कर ग्रहों को पांच श्रेणियों में बांटा. यह वर्गीकरण मौजूदा पृथ्वी, प्रारंभिक पृथ्वी, मंगल, बुध या शनि के चंद्रमा टाइटन के आधार पर किया गया. हर मामले में जीवन की प्रत्याशा का अनुमान लगाया गया.

इन सभी स्थानों पर वातावरण है और सौर मंडल में जीवन के लिए ये स्थान सर्वाधिक अनुकूल हैं. विश्वविद्यालय के क्रिस्टोफर बिशप ने कहा, “फिलहाल हमारी रुचि एक काल्पनिक, बुद्धिमान, सौरमंडल में मौजूद अन्य ग्रहों का विश्लेषण करने वाले अंतरिक्ष यान को प्राथमिकता देने के लिए इन एएनएन में है. उन्होंने कहा, भविष्य में रोबोटिक अंतरिक्ष यान में प्रौद्योगिकी के उपयोग की जरूरत पड़ने पर इसकी जरूरत पड़ेगी. एएनएन ऐसे तंत्र हैं, जो मानव मस्तिष्क की तरह समझने की कोशिश करता है. लीवरपूल में यूरोपियन वीक ऑफ एस्ट्रोनॉमी एंड स्पेस साइंस (ईडब्ल्यूएएसएस) में इस शोध को प्रस्तुत किया गया था.