दिल्ली की वायु गुणवत्ता 'बहुत खराब' से फिर हुई 'गंभीर'

प्रतिकात्मक तस्वीर।
हाइलाइट्स

  • प्रदूषण स्तर शनिवार सुबह आंशिक रुप से कम होकर सूचकांक 394 पर आ गया था
  • शाम को प्रदूषण फिर ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ हो गया और सूचकांक 403 दर्ज किया
  • दिल्ली में पीएम 2.5 स्तर 261 दर्ज किया गया, जबकि पीएम 10 416 दर्ज किया गया
  • दिल्ली के 20 क्षेत्रों में ‘गंभीर’ वायु गुणवत्ता रही, जबकि 15 में ‘बहुत खराब’ प्रदूषण स्तर
नई दिल्ली

दिल्ली में शनिवार सुबह मामूली सुधार के बाद वायु की गुणवत्ता प्रतिकूल मौसम और पराली जलाये जाने से प्रदूषण में हुई वृद्धि के कारण शाम को फिर ‘गंभीर’ हो गई। प्रदूषण स्तर सुबह आंशिक रुप से कम हुआ था और सूचकांक 394 पर आ गया था। लेकिन शाम को प्रदूषण की स्थिति फिर ‘बहुत खराब’ से ‘गंभीर’ हो गई एवं सूचकांक 403 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शनिवार को दिल्ली में पीएम 2.5 (हवा में तैरते 2.5 माइक्रोमीटर से भी कम व्यास के कण) स्तर 261 दर्ज किया गया, जबिक पीएम 10 (हवा में तैरते 10 माइक्रोमीटर से भी कम व्यास के कण) 416 दर्ज किया गया।

बोर्ड के अनुसार दिल्ली के 20 क्षेत्रों में ‘गंभीर’ वायु गुणवत्ता रही, जबकि 15 क्षेत्रों में ‘बहुत खराब’ प्रदूषण स्तर रहा। बोर्ड के मुताबिक, गाजियाबाद, फरीदाबाद और ग्रेटर नोएडा में गंभीर वायु गुणवत्ता दर्ज की गई जबिक नोएडा और गुड़गांव में बहुत खराब वायु गुणवत्ता दर्ज की गई। वायु गुणवत्ता 0 से 50 तक अच्छी मानी जाती है, 51 से 100 तक संतोषजनक, 101 से 200 तक मध्यम, 201 से 300 तक खराब, 301 से 400 तक बहुत ही खराब और 401 से 500 गंभीर मानी जाती है।

भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान के अनुसार पीएम 2.5 सांद्रता में वृद्धि के कारण मौसम संबंधी स्थिर परिस्थिति, दिल्ली में प्रदूषकों के वायुमंडल में तैरने और पराली जलाने से इस इसमें हुआ इजाफा शामिल है। संस्थान ने कहा कि दिल्ली के पड़ोसी राज्यों में बृहस्पतिवार को पराली जलाने की घटना इस साल सर्वाधिक दर्ज की गई। इससे हो सकता है कि राष्ट्रीय राजधानी में पहले से गंभीर वायु गुणवत्ता और बिगड़ जाए।